संवाददाता -पाली से दीपक शर्मा
*कोरबा/पाली:-* 18 साल पुराना भवन आज खंडहर में तब्दील। जिस जनपद पंचायत कार्यालय से पूरे पाली क्षेत्र की विकास योजनाओं का संचालन होता है, उसी की छत से प्लास्टर गिर रहा है और दीवारें दरक रही हैं,बाथरूम की दीवारों की बात करे तो वहाँ तो पेड़ उगने लगे है,जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह दफ्तर अब कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और यहां काम से आने वाले ग्रामीणों के लिए “हादसे का द्वार” बन गया है।
*2008 में बना था 18 लाख का भवन*
जनपद पंचायत पाली के भवन का भूमिपूजन वर्ष 2007 और लोकार्पण 2008 में किया गया था। तत्कालीन समय में लगभग 18 लाख रुपये की लागत से इस भवन का निर्माण हुआ था। निर्माण के समय इसे पाली क्षेत्र के विकास का प्रतीक बताया गया था। लेकिन बीते 17-18 सालों में न तो इसकी नियमित मरम्मत हुई और न ही रखरखाव पर ध्यान दिया गया। नतीजा यह कि आज यह भवन जर्जर हो चुका है।
*पहले भी गिर चुका है प्लास्टर, दो जनप्रतिनिधि हुए थे घायल*
भवन की जर्जर हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ साल पहले छत से प्लास्टर का हिस्सा अचानक गिर गया था। इस हादसे में उस समय के तत्कालीन जनपद उपाध्यक्ष नवीन सिंह के सर पर चोट लगी थी साथ ही आज से कुछ माह पहले जनपद सदस्य पति अनिल टंडन भी जनपद उपाध्यक्ष कक्ष का प्लास्टर गिरने से घायल हो गए थे। इसके बाद भी प्रशासन और संबंधित विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। न कोई मरम्मत हुई, न कोई वैकल्पिक व्यवस्था।
*कर्मचारी जान जोखिम में डालकर कर रहे काम*
वर्तमान में इस भवन में जनपद के अधिकारी, कर्मचारी रोजाना बैठकर जनता के काम निपटा रहे हैं। पंचायतों से जुड़े प्रस्ताव, मनरेगा, आवास, पेंशन और अन्य योजनाओं की फाइलें यहीं बनती हैं। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है,और कई कमरों की दीवारों में दरारें साफ दिखाई देती हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि कई बार उच्च अधिकारियों को भवन की स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। वहीं जनप्रतिनिधि भी बैठकों के दौरान डरे-सहमे रहते हैं।
*ग्रामीणों पर भी मंडरा रहा खतरा*
सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से अपने काम के लिए आने वाले ग्रामीण भी इस जर्जर भवन में प्रवेश करने को मजबूर हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांगजन जब पेंशन या अन्य प्रमाण पत्र बनवाने आते हैं तो उन्हें भी उसी छत के नीचे घंटों बैठना पड़ता है जो कभी भी गिर सकती है।
*क्या कहती है प्रशासन*
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि या तो इस भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए या फिर नए भवन का निर्माण किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
फिलहाल पाली का जनपद कार्यालय इस बात का उदाहरण बन गया है कि कैसे सरकारी अनदेखी से विकास की इमारतें भी समय से पहले ध्वस्त हो जाती हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक नींद से जागता है, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही इस कार्यालय का उद्धार होगा।








