नुनेरा. ग्राम नुनेरा में छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध लोकपर्व भोजली तिहार बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। रक्षाबंधन के दूसरे दिन पूरे गांव में भाईचारे और अटूट मित्रता के इस पर्व की धूम रही।
कार्यक्रम की शुरुआत नाग पंचमी के दिन हुई थी, जब गांव की महिलाओं और युवतियों ने कुम्हार के घर से लाई गई खाद-मिट्टी से बांस की टोकरी में गेहूं के बीज बोए थे। 9 दिनों तक विधि-विधान से भोजली की सेवा, पूजा-अर्चना और भोजली गीतों का गायन किया गया।
रविवार शाम को गांव की सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर भोजली की टोकरियां रखकर ढोल-नगाड़ों के साथ शोभायात्रा निकाली और गांव के मुख्य तालाब में भोजली का विसर्जन किया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की अनूठी *’मितान’* परंपरा का निर्वहन किया गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे के कान में भोजली खोंसकर “भोजली गियां मितान” कहकर आजीवन मित्रता और सुख-दुख में साथ निभाने का संकल्प लिया। बुजुर्गों का कहना है कि भोजली की ऊंचाई और हरियाली को देखकर इस वर्ष की फसल का अनुमान लगाया जाता है, इस बार भोजली की अच्छी बढ़त से अच्छी फसल की उम्मीद है।
इस अवसर पर ग्राम सरपंच, पंचगण, वरिष्ठ नागरिक महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।








