सभापति माया रुपेश कँवर रहीं मुख्य अतिथि
*पाली।* महिला एवं बाल विकास परियोजना पाली अंतर्गत सेक्टर डूमरकछार के ग्राम पोटापानी में सेवा संकल्प अभियान के तहत आंगन मिलन एवं सुपोषण चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम जिला पंचायत कोरबा की स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग की सभापति श्रीमती माया रुपेश कंवर के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं में पोषण, स्वास्थ्य एवं समुचित देखभाल को लेकर जागरूकता बढ़ाना तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना रहा।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत पोटापानी के सरपंच, उप-सरपंच, कोटवार, महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर श्रीमती ज्योति सोनी, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य, मितानिनें एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में सुपरवाइजर ज्योति सोनी द्वारा पोषण एवं स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई और हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।
*स्वस्थ बचपन ही सशक्त समाज की नींव : माया कंवर*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभापति माया रुपेश कंवर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के जन्मदिवस एवं उनके सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आंगन मिलन एवं घर-घर मुनगा अभियान के माध्यम से पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ एवं सुपोषित बचपन ही सशक्त समाज की नींव है। बच्चों, शिशुवती माताओं एवं बालिकाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। गर्भवती माताओं को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
*योजनाओं की दी जानकारी*
श्रीमती कंवर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं और बच्चों के हित में अनेक योजनाएं चला रही है। उन्होंने नोनी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित विभाग की अन्य योजनाओं की जानकारी दी और पात्र हितग्राहियों से लाभ लेने की अपील की।
उन्होंने कहा कि शासन की योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनकी जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सभी को मिलकर कुपोषण की रोकथाम और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता बढ़ानी होगी।







