पाली/
परस्पर विरोधाभास से भरे वर्तमान वातावरण में मानव समाज की पूर्णता और समग्र उत्थान के उद्देश्य से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षाविद, इंजीनियर, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा ,कृषक एक मंच पर जीवन विद्या के क्षेत्रीय सम्मेलन में शिरकत किए.
पाली के बड़ादेव शक्तिपीठ गोंडवाना भवन में जीवन विद्या पर आधारित सम्मेलन आयोजित हुआ. जिसमें शिक्षा के प्रसार के साथ मानव आचरण निश्चित हुआ है या अनिश्चित? भौतिक सुविधाओं के बढ़ने के साथ पारिवारिक संबंध मजबूत हुए हैं या टूट रहे हैं ?स्वास्थ्य सेवा और सुविधाओं के विस्तार के साथ बीमारियां बढ़ी है या घटी है? न्यायालय और विधिक व्यवस्थाओं के विस्तार के साथ शिकायत विवाद अपराध कम हुए हैं या बढ़े हैं? पृथ्वी का तापमान बढ़ने से उत्पन्न पर्यावरण संतुलन आदि अनंत ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और विचार विमर्श हुआ. साथ ही इसमें मानव समाज की भागीदारी पर भी चर्चा हुई. जीवन क्या है और इसे कैसे जिया जाए इस पर विचारकों, वक्ताओं ने बताया कि अस्तित्व मूलक मानव केंद्रित चिंतन ही मध्यस्थ दर्शन.है, और इसी पर आधारित जीवन जीने की कला को जीवन विद्या कहते हैं.इसे अमरकंटक के श्री ए. नागराज ने लगभग 3 दशक पूर्व प्रतिपादित किया.बताया गया कि भौतिकवाद और आध्यात्मवाद के मध्य रोज का जीवन तनावमुक्त कैसे जिया जाए,यहीं जीवन विद्या या कला है. इसका लक्ष्य व्यक्ति में समाधान- सुख ,परिवार में समृद्धि,समाज में समर्पण और विश्वास और प्रकृति में सह-अस्तित्व है .कहा गया है कि मनुष्य आज तक पशु-चेतना में जी रहा है. ज्यादा खाना, ज्यादा पैसा, ज्यादा भोग. इसी से अपराध, युद्ध और प्रदूषण बढ़ा है. इससे निकलकर मानव-चेतना में जीना ही जागृति है.एक लाइन में – जीयो और जीने दो” के सिद्धांत पर, भ्रम और अपराध से मुक्त होकर, परिवार और समाज में व्यवस्था के साथ जीना ही जीवन विद्या है।शिविर में डा. साधन भट्टाचार्य, शिक्षाविद मानव तीर्थ बेमेतरा.डा. संकेत ठाकुर, कृषि वैज्ञानिक एवं संचालक अभ्युदय संस्थान रायपुर,अंकित पौंगुला महासचिव दिव्य पथ संस्थान.अमरकंटक (अंतर्राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त), श्रीमती निष्ठा सोनी शिक्षिका पेंड्रा रोड, चंद्रशेखर शिक्षाविद आर्किटेक्ट, मीनाक्षी राठौर रायपुर, गेंदलाल कोकड़िया महासमुंद,सुरेंद्र गुप्ता रायगढ़, लक्ष्मी पटेल जांजगीर आदि का सानिध्य प्राप्त हुआ. शिविर के सफल आयोजन में जीवन विद्या परिवार पाली के राममिलन यादव, बिहारी लाल नवलानी, अरविंद पांडे, लक्ष्मी चंद भावनानी, राजेश पटेल, रघुनंदन कश्यप सहित अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.






