*स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलती तस्वीर, ग्रामीण मरीजों को हो रही भारी परेशानी, जिम्मेदार मौन*
*पाली (कोरबा)।* प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लाख दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। इसका ताजा उदाहरण पाली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है, जहां अव्यवस्था और बदहाली ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। अस्पताल परिसर में फैली गंदगी और बुनियादी चिकित्सकीय उपकरणों के अभाव में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है।
*परिसर में गंदगी, स्वच्छता अभियान को ठेंगा*
अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही गंदगी का आलम नजर आता है। जगह-जगह कचरे के ढेर, इस्तेमाल की हुई पट्टियां, बोतलें और गंदा पानी पसरा हुआ है। अस्पताल में नियमित साफ-सफाई और फिनाइल छिड़काव की व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी है। शौचालयों की स्थिति तो और भी बदतर है, जहां दुर्गंध के कारण मरीजों और उनके परिजनों का खड़ा रहना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में स्वच्छ भारत मिशन और संक्रमण से बचाव के दावे केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं।
*बिना थर्मामीटर-स्टेथोस्कोप के कैसे हो जांच?*
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल में मरीजों की प्राथमिक जांच के लिए जरूरी उपकरण भी मौजूद नहीं हैं। परिजनों का आरोप है कि बुखार नापने के लिए थर्मामीटर खराब पड़ा है और डॉक्टर बिना स्टेथोस्कोप के ही मरीजों की जांच करने को मजबूर हैं। बुखार, सर्दी-खांसी और हृदय व फेफड़ों से जुड़ी जांच के लिए ये उपकरण सबसे जरूरी माने जाते हैं। इनके बिना अंदाजे से इलाज करना मरीजों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है।
*दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण मरीज सबसे ज्यादा परेशान*
पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पाली विकासखंड के साथ-साथ मादन, बकसाही, चैतमा, लाफा सहित दर्जनों ग्राम पंचायतों से मरीज इलाज के लिए आते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा का यही एकमात्र बड़ा सहारा है। ग्रामीणों ने बताया कि वे सुबह से लंबी लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, लेकिन जब जांच के लिए उपकरण ही नहीं मिलते तो उन्हें निराश होकर निजी क्लीनिकों में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है। गरीब तबके के मरीजों के लिए यह दोहरी मार है।
*रखरखाव और निगरानी का अभाव*
अस्पताल में उपकरणों के खराब होने के बाद उनकी मरम्मत और रखरखाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। स्टॉक रजिस्टर में उपकरणों की मौजूदगी तो दिखाई जाती है, लेकिन हकीकत में वे या तो खराब पड़े हैं या अलमारी में बंद हैं। सवाल उठता है कि अस्पताल प्रभारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण क्यों नहीं करते? खराब उपकरणों की जगह नए उपकरणों की मांग क्यों नहीं की जा रही है?
*स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई की मांग*
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने जिला स्वास्थ्य अधिकारी और कलेक्टर से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में नियमित साफ-सफाई कर्मचारियों की तैनाती, बायो-मेडिकल कचरे का सही निपटान और सभी आवश्यक चिकित्सकीय उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल पाली अस्पताल की बदहाली को देखकर यही कहा जा सकता है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भटकना पड़ेगा।





